Saturday, August 14, 2010

माझी आवडती गझल

गुलाम अलींनी गायलेली चमकते चांद को टुटा हुआ तारा बना डाला ही अप्रतिम गझल मला अत्यंत जवळची आहे. मी अमेरिकेतून अपयशचाचा धनी होऊन परत यायच्या वेळी या गझलीमधील शब्दन शब्द म्हणजे माझ्याच भावना बोलून दाखवत होता. आजही ही गझल ऐकली की नकळतपणे डोळे पाणावतात.एखाद्या गझलीचे आपल्या भावना १००% बोलून दाखवायचे सामर्थ्य बघितले की थक्क व्हायला होते.

चमकते चांद को.....
चमकते चांद को टुटा हुआ तारा बना डाला
चमकते चांद को टुटा हुआ तारा बना डाला
मेरी आवारगी ने मुझको आवारा बना डाला
चमकते चांद को टुटा हुआ तारा बना डाला

बडा दिलकष बडा रंगीन है ये शेहर केहते है
बडा दिलकष बडा रंगीन है ये शेहर केहते है
यहापर है हजारो घर घरोंमै लोग रेहते है
मुझे इस शहर ने गलीयोंका बंजारा बना डाला
चमकते चांद को टुटा हुआ तारा बना डाला

मै इस दुनिया को अक्सर देख कर हैरान होता हू
मै इस दुनिया को अक्सर देख कर हैरान होता हू
ना मुझसे बन सका छोटा सा घर दिनरात रोता हू
खुदाया तुने कैसे ये जहा सारा बना डाला
चमकते चांद को टुटा हुआ तारा बना डाला

मेरे मालिक मेरा दिल क्यू तडपता है सुलगता है
मेरे मालिक मेरा दिल क्यू तडपता है सुलगता है
तेरी मरजी तेरी मरजी पे जोर किसका चलता है
किसी को गुल किसी को तुने अंगारा बना डाला
चमकते चांद को टुटा हुआ तारा बना डाला

यही आगाझ था मेरा यही अंजाम होना था
यही आगाझ था मेरा यही अंजाम होना था
मुझे बरबाद होना था मुझे नाकाम होना था
मुझे तकदिर ने तकदिर का मारा बना डाला
चमकते चांद को टुटा हुआ तारा बना डाला